उत्तराखंड

रामनगर में गंगा आरती की तर्ज पर मां कोसी की महाआरती में पांच ब्राह्मणों ने विधि-विधान के साथ की आरती

उत्तराखण्ड
11 अक्टूबर 2026
रामनगर में गंगा आरती की तर्ज पर मां कोसी की महाआरती में पांच ब्राह्मणों ने विधि-विधान के साथ की आरती
रामनगर। प्रसिद्ध मां गर्जिया (गिरिजा) देवी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिला. जहां कोसी नदी के तट पर भव्य महाआरती का आयोजन किया गया. हरिद्वार और ऋषिकेश में होने वाली गंगा आरती की तर्ज पर आयोजित इस महाआरती में पांच ब्राह्मणों ने विधि-विधान के साथ मां कोसी की आरती उतारी. इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु महाआरती के साक्षी बने. वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े और आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं.

रामनगर के प्रसिद्ध गिरिजा देवी (गर्जिया देवी) मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन आयोजित इस महाआरती के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया. मां कोसी के पावन तट पर पांच ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न कराई. इस दौरान मां गिरिजा देवी और मां कोसी के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. काफी संख्या में स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और मां कोसी की आरती के दर्शन किए. इस आयोजन की पहल स्थानीय बीजेपी नेता एवं हिंदूवादी नेता मदन जोशी की ओर से की गई.

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअली जुड़कर अपने संदेश में कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी आस्था, आध्यात्मिक परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है. हमारी नदियां केवल जलधारा नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और जीवन की आधारशिला हैं. मां कोसी के तट पर आयोजित महाआरती श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होने के साथ-साथ नदियों की स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देती है.

सीएम धामी ने कहा कि सभी को संकल्प लेना चाहिए कि नदियों की पवित्रता बनाए रखेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को सुरक्षित रखेंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और समाज में आपसी सद्भाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. महाआरती में शामिल श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना करते हुए मांग की कि मां कोसी की आरती नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए. ताकि, स्थानीय लोगों के साथ-साथ रामनगर आने वाले पर्यटक भी इस आध्यात्मिक आयोजन का हिस्सा बन सकें. अब श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि यह आयोजन नियमित रूप लेगा और गिरिजा धाम की धार्मिक पहचान को एक नई पहचान मिलेगी.

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