उत्तराखंड

छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व देने की तैयारी

उत्तराखण्ड
14 सितम्बर 2026
छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व देने की तैयारी
देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है. उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने अधिकारियों को तीन दिन के भीतर शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कुलपतियों से छात्र संघ और छात्र परिषदों के मौजूदा प्रतिनिधित्व ढांचे में संशोधन कर चुनाव की तिथियां जल्द घोषित करने को कहा.

उच्च शिक्षा विभाग के मुताबिक, उच्च शिक्षण संस्थानों में 65 फीसदी से ज्यादा छात्राएं अध्ययनरत हैं. ऐसे में कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने इसे छात्राओं की भागीदारी को महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बताया. साथ ही शिक्षण संस्थानों को सेवा संकल्प अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए.

उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में होने वाले छात्र संघ चुनावों का स्वरूप बदलने की तैयारी है. अब छात्र संघ और छात्र परिषदों में छात्राओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व देने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इसके लिए राज्य विश्वविद्यालयों के मौजूदा प्रतिनिधित्व ढांचे में संशोधन किया जाएगा. उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने को कहा है.

छात्र राजनीति में छात्राओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारीरू प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की संख्या 65 फीसदी से ज्यादा बताई जा रही है. इसके बावजूद छात्र संघों और छात्र परिषदों में उनकी भागीदारी उसी अनुपात में नहीं है. ऐसे में छात्र राजनीति में छात्राओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 50 फीसदी प्रतिनिधित्व का प्रावधान किए जाने की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद छात्र संघ चुनावों में छात्राओं की भागीदारी केवल मतदाता के तौर पर ही नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व और नेतृत्व के स्तर पर भी बढ़ सकती है. विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्राओं से जुड़े मुद्दों को छात्र संघ के मंच पर अधिक प्रभावी तरीके से उठाने की संभावना भी बढ़ेगी. हालांकि, इसके लिए पहले विश्वविद्यालयों में छात्र संघ और छात्र परिषदों के प्रतिनिधित्व से जुड़े मौजूदा नियमों में संशोधन करना होगा.

तीन दिन के भीतर शासन को प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देशरू उच्च शिक्षा विभाग में अधिकारियों को इस संबंध में तीन दिन के भीतर शासन को प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद शासन स्तर पर प्रस्ताव का परीक्षण और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विश्वविद्यालयों में इसे लागू किया जा सकेगा.

इसके साथ ही राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को छात्र संघ चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चुनाव की तिथियां जल्द घोषित करने के निर्देश दिए गए हैं. ऐसे में अब विश्वविद्यालयों के सामने एक ओर प्रतिनिधित्व के ढांचे में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर छात्र संघ चुनावों को समय पर कराने की जिम्मेदारी भी है.

छात्र राजनीति में लंबे समय से छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जाती रही है. उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की संख्या ज्यादा होने के बावजूद नेतृत्व के पदों पर उनकी पर्याप्त भागीदारी नहीं होने का सवाल उठता रहा है. 50 फीसदी प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव इसी अंतर को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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