मानसून में सैलानी नहीं कर सकेंगे ढिकाला जोन का दीदार
उत्तराखण्
7 मई 2026
मानसून में सैलानी नहीं कर सकेंगे ढिकाला जोन का दीदार
रामनगर। विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में इन दिनों पर्यटन सीजन अपने चरम पर पहुंच चुका है. कॉर्बेट का सबसे चर्चित और विश्व विख्यात लोकप्रिय ढिकाला पर्यटन जोन 15 जून से मानसून के चलते बंद होने जा रहा है. ऐसे में देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक कॉर्बेट पहुंच रहे हैं, ताकि बंद होने से पहले जंगल सफारी, नाइट स्टे और टाइगर दर्शन का रोमांचक अनुभव लिया जा सके. कॉर्बेट पार्क में इस समय सफारी और नाइट स्टे का पीक टाइम चल रहा है. मई और जून का महीना वाइल्डलाइफ व्यूइंग के लिहाज से सबसे बेहतरीन माना जाता है. जंगल सूखा व गर्मी होने के कारण वन्यजीव पानी के स्रोतों के आसपास अधिक दिखाई देते हैं. यही वजह है कि इन दिनों टाइगर, हाथी, हिरण, सांभर,लेपर्ड भालू वन्यजीवों के साथ कई पक्षियों जैसे वन्यजीवों की साइटिंग काफी बढ़ गई है.
दरअसल हर साल मानसून सीजन शुरू होने से पहले 15 जून को कॉर्बेट का सबसे लोकप्रिय ढिकाला जोन पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है. मानसून समाप्त होने के बाद इसे पुनः 15 नवंबर से खोला जाता है. वन विभाग के अनुसार बारिश के दौरान जंगल के कच्चे रास्ते, नदी-नाले और जंगल के संवेदनशील मार्ग पर्यटकों की सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरे हो जाते हैं. इसी कारण हर वर्ष मानसून सीजन में यह जोन बंद रखा जाता है. ढिकाला जोन अपनी विशाल ग्रासलैंड, घने जंगल और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, यहां खुले मैदानों में अक्सर हाथियों के झुंड, हिरणों के समूह और टाइगर की मूवमेंट आसानी से देखी जा सकती है.
जंगल प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के लिए ढिकाला किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता, ढिकाला क्षेत्र के पास से बहने वाली रामगंगा नदी इस पूरे इलाके की सुंदरता को और भी खास बना देती है. नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल और ऊदबिलाव जैसे जलीय जीव भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, सुबह और शाम के समय रामगंगा नदी के किनारे वन्यजीवों की गतिविधियां देखने के लिए पर्यटक बड़ी संख्या में सफारी का आनंद लेते नजर आ रहे हैं कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला के अनुसार इस समय कॉर्बेट में टाइगर साइटिंग की संभावना भी काफी बढ़ जाती है, क्योंकि जंगल सूखा होने के चलते अधिकतर वन्यजीव पानी के आसपास दिखाई देते हैं. यही कारण है कि सफारी के दौरान पर्यटकों को वन्यजीवों के दर्शन आसानी से हो रहे हैं.


