रक्षाबंधन से पहले आम जनता को महंगाई का झटका
उत्तराखण्ड
25 अगस्त 2026
रक्षाबंधन से पहले आम जनता को महंगाई का झटका
देहरादून। त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले लोगों को महंगाई का झटका लगा है. मिठाई विक्रेताओं ने मिठाई के दाम बढ़ा दिए हैं. चीनी, देसी घी, काजू, बादाम, पिस्ता और चांदी वर्क समेत मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी कच्चे माल के दाम पिछले साल के मुकाबले बढ़ गए हैं. देहरादून मिठाई एसोसिएशन की अगस्त 2026 की मूल्य सूची में कई सामान की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मिठाई एसोसिएशन ने बैठक कर मिठाई पर 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया है. मिठाई के दाम बढ़ने से आम जनता पर सीधा असर पड़ेगा.
मिठाई कारोबार में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमत में एक साल में करीब 59 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. हलवाई समिति के अनुसार, अगस्त 2025 में चीनी 44 रुपए प्रति किलो थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 70 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है. चीनी के दाम बढ़ने का सीधा असर मिठाइयों की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है.
मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले मेवा के बढ़ते दाम भी कारोबारियों की चिंता बढ़ा रहे हैं. मिठाई एसोसिएशन के मुताबिक, देहरादून में काजू 800 से बढ़कर 1040 रुपए प्रति किलो और बादाम गिरी 670 से बढ़कर 1050 रुपए प्रति किलो हो गई है. सबसे ज्यादा तेजी पिस्ते की कीमत में देखने को मिली है. अगस्त 2025 में 1950 रुपए किलो बिकने वाला पिस्ता अब 4500 रुपए किलो पहुंच गया है. यानी एक साल में पिस्ते के दाम 130 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए हैं. इसका असर खास तौर पर पिस्ता और मेवा आधारित महंगी मिठाइयों की लागत पर पड़ने की संभावना है.
मिठाई कारोबार में इस्तेमाल होने वाला देसी घी 620 से बढ़कर 720 रुपए प्रति किलो हो गया है. वनस्पति घी (डालडा) के दाम 140 से बढ़कर 170 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं. बेसन 80 से बढ़कर 85 रुपए और आटा 32 से बढ़कर 35 रुपए प्रति किलो हो गया है. दूध की कीमत भी 63 से बढ़कर 68 रुपए प्रति किलो दर्ज की गई है. इसके अलावा छोटी इलायची, लाल मिर्च और चांदी वर्क के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर मिठाइयों की लागत पर दिखाई देने लगा है. मिठाई एसोसिएशन की सूची के मुताबिक, सोहन हलवा 1000 से बढ़कर 1100 रुपए प्रति किलो हो गया है. आटा लड्डू और बेसन लड्डू की कीमत 600 से बढ़कर 680 रुपए प्रति किलो दर्ज की गई है. हालांकि, कच्चे माल के दाम बढ़ने के बावजूद हर मिठाई के बिक्री मूल्य में उसी अनुपात में बढ़ोतरी हो, यह जरूरी नहीं है. मिठाई कारोबारी बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन कर सकते हैं या फिर उसका भार ग्राहकों पर डाल सकते हैं


