उत्तराखंड

पहले कहासुनी, फिर हाथापाई, बाद में कई राउंड फायरिंग

उत्तराखण्ड
13 जुलाई 2026
पहले कहासुनी, फिर हाथापाई, बाद में कई राउंड फायरिंग
बाजपुर। बाजपुर क्षेत्र के बन्नाखेड़ा में रास्ते के विवाद ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब दो पक्षों के बीच हुई कहासुनी के बाद ताबड़तोड़ गोलियां चल गईं फायरिंग में एक युवक घायल हो गया. जबकि, पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि पहले से शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते यह घटना हुई.

जानकारी के मुताबिक, मामला बाजपुर क्षेत्र के बन्नाखेड़ा स्थित दाबका नदी के किनारे का है, जहां मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते खूनी संघर्ष का रूप ले लिया. दो पक्षों के बीच रास्ते के विवाद को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक पक्ष ने दूसरे पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस गोलीबारी में मनदीप सिंह नामक युवक गोली लगने से घायल हो गया. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया.

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो पहले दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में हाथापाई में बदल गई. इसके बाद आरोपी पक्ष ने कथित तौर पर हथियार निकालकर कई राउंड फायरिंग कर दी. गोली लगते ही मनदीप सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया. मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है.

घटना की सूचना मिलते ही बन्नाखेड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया. पुलिस ने एहतियातन दोनों पक्षों के घरों पर दबिश दी, लेकिन आरोपी पक्ष के लोग मौके से फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है. मामले में काशीपुर एसपी स्पन्न कुमार सिंह ने फोन पर फायरिंग की घटना की पुष्टि की है.

नरेश चौहान, प्रभारी निरीक्षक, बाजपुर कोतवाली ने बताया कि रास्ते के विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच फायरिंग हुई है. पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी

घायल युवक के परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपी पिछले काफी समय से घर के आसपास पिस्टल लेकर घूमते थे और खुलेआम जान से मारने की धमकियां देते थे. उनका कहना है कि आरोपी कथित रूप से खैर की तस्करी से जुड़े हैं और उनके घर के रास्ते से आवाजाही करते थे. जब इसका विरोध किया गया तो उन्होंने धमकी दी कि यदि रास्ता रोका गया तो गोली मार देंगे.

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले ही चौकी प्रभारी को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की. उनका आरोप है कि आरोपी 15 से 20 लोगों के समूह में आते थे और लगातार डराने-धमकाने का प्रयास करते थे. परिवार का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो यह घटना टाली जा सकती थी.

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गोली पैर के बजाय शरीर के किसी संवेदनशील हिस्से में लग जाती और जान चली जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? फिलहाल, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है. वहीं. इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

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