उत्तराखंड

आदि कैलाश और ऊं पर्वत के लिए 20 श्रद्धालुओं का जत्था रवाना

उत्तराखण्ड
8 मई 2026
आदि कैलाश और ऊं पर्वत के लिए 20 श्रद्धालुओं का जत्था रवाना
हल्द्वानी। उत्तराखंड के धार्मिक स्थल आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा 1 मई से शुरू हो चुकी है. 1 मई को धारचूला से पिथौरागढ़ के डीएम ने 200 यात्रियों के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. आज 8 मई को काठगोदाम से भी आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा का 20 श्रद्धालुओं का जत्था अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के लिए रवाना किया गया. यात्रा के दौरान ये श्रद्धालु कैंची धाम, चितई मंदिर और जागेश्वर धाम के दर्शन भी करेंगे. कुमाऊं मंडल विकास निगम ने यात्रियों के स्वागत और सुरक्षा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं.

काठगोदाम से आदि कैलाश और ऊं पर्वत के लिए तीर्थयात्री रवानारू आज शुक्रवार सुबह 8 बजे कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों का स्वागत कर उन्हें कैंची धाम के लिए रवाना किया. काठगोदाम से रवाना हुए पहले दल में कुल 20 श्रद्धालु शामिल हैं. इनमें 13 महिलाएं और 7 पुरुष यात्री शामिल हैं. यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. कुमाऊं मंडल विकास निगम यानी ज्ञडटछ की ओर से यात्रियों के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं. यात्रियों के ठहरने, भोजन, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विशेष इंतजाम किया गया है.

यात्री कैंची धाम, चितई गोलू देवता और जागेश्वर धाम के दर्शन भी करेंगेरू रवाना होने से पहले पारंपरिक कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धालुओं का काठगोदाम में स्वागत किया गया. भवाली में सभी श्रद्धालुओं का विधिवत स्वागत किया जाए. काठगोदाम में अल्प विराम के बाद जत्थे को रवाना किया गया. यह यात्रा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. यात्रा के दौरान श्रद्धालु प्रसिद्ध कैंची धाम, चितई गोलू देवता मंदिर और जागेश्वर धाम के दर्शन भी करेंगे.

तीन मंदिरों के दर्शन के बाद जत्था आदि कैलाश और ऊं पर्वत रवाना होगारू इसके बाद दल पिथौरागढ़ होते हुए आदि कैलाश और ॐ पर्वत की ओर आगे बढ़ेगा. आदि कैलाश को भगवान शिव का पवित्र धाम माना जाता है, जबकि ॐ पर्वत अपनी प्राकृतिक बनावट में दिखाई देने वाले ‘ॐ’ के चिन्ह के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं. प्रशासन और पर्यटन विभाग का कहना है कि इस बार यात्रा को और अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है.

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