अहोई अष्टमी का पर्व कल, माता अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना के लिए रखती यह व्रत
उत्तराखण्ड
31 अक्टूबर 2026
अहोई अष्टमी का पर्व कल, माता अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना के लिए रखती यह व्रत
काशीपुर। अहोई अष्टमी इस वर्ष एक नवंबर को मनाया जाएगा। माता अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना के लिए महापर्व अहोई अष्टमी का पूजन करती है ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार रविवार को दोपहर 2.52 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी जिसके ठीक बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
अहोई अष्टमी तिथि को लेकर लोगों में बने असमंजस को पं. दीपक शर्मा ने दूर किया। उन्होंने बताया कि सायंकाल तारा दर्शन से पूर्व ही अष्टमी तिथि लग रही है इसलिए अहोई देवी का मुख्य पूजन-अर्चन और अर्घ्य दान रविवार को संध्या समय में ही संपन्न होगा। अगले दिन यानी दो नवंबर को अष्टमी तिथि दिन में केवल 1.11 बजे तक ही रहेगी। ऐसी स्थिति में उदयातिथि और प्रदोष काल के विशेष संयोग को देखते हुए अहोई देवी का व्रत और पूजन एक नवंबर को ही शास्त्रसम्मत है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अहोई देवी धन, धान्य और संतान की रक्षा करने वाली साक्षात सुख-सौभाग्य की प्रदाता हैं। इस दिन माताएं दिनभर निर्जला उपवास रखकर शाम को दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाकर या स्याऊ के दाने रखकर विधि-विधान से पूजा करती हैं। पुराणों में वर्णित है कि अहोई माता का निष्ठापूर्वक व्रत व अर्चन करने से समस्त पारिवारिक कष्ट दूर होते हैं और संतान को दीर्घायु व उन्नति की प्राप्ति होती है।


