राज्य आंदोलनकारियों चिन्हीकरण और नौकरी आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर सड़कों पर
उत्तराखण्ड
10 जुलाई 2026
राज्य आंदोलनकारियों चिन्हीकरण और नौकरी आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर सड़कों पर
देहरादून। उत्तराखंड में राज्य आंदोलनकारियों एक बार फिर सड़कों पर उतरने वाले हैं. चिन्हीकरण और क्षैतिज आरक्षण की मांग को लेकर आज राज्य भर के आंदोलनकारी देहरादून कूच करेंगे. साथ ही आंदोलनकारी जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे. राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति आंदोलन को सफल बनाने के लिए देहरादून चलो का आह्वान किया है. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा. वहीं प्रशासन ने आंदोलनकारियों के घेराव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है.
गौर हो कि राज्य आंदोलनकारी आज चिन्हीकरण और नौकरी आरक्षण की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करने जा रहे हैं. इसको लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने देहरादून चलो का आह्वान किया है. चिन्हीकरण व क्षैतिज आरक्षण को लेकर आंदोलनकारियों में नाराजगी है. चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप का कहना है कि राज्य भर के आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर देहरादून चलो का आह्वान किया है. जहां उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन नेगी के नेतृत्व में संयुक्त मार्च निकालते हुए जिलाधिकारी देहरादून कार्यालय का घेराव किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि 9 नवंबर को राज्य स्थापना के दिन सरकार ने घोषणा की थी कि 6 माह के भीतर राज्य के तमाम आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण हो जाएगा, 6 माह से भी अधिक का वक्त गुजर गया, लेकिन मांगों का निस्तारण अभी तक नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून से भी कई आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित है. धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि जब से नए जिलाधिकारी देहरादून में आए हैं, तब से उन्हें लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं. राज्य गठन की लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण का मामला अभी भी लंबित है. इससे आंदोलनकारियों में भारी रोष है.
बता दें कि सभी राज्य आंदोलनकारियों का तत्काल चिन्हीकरण, सरकारी नौकरियों में 10ः क्षैतिज आरक्षण लागू करना, और पेंशन व अन्य सुविधाएं देने की मांग तत्काल पूरी नहीं हुई तो आंदोलनकारियों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है. वहीं राज्य गठन की लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों का मामला लंबे समय से लंबित है. जिससे आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है. उन्होंने सरकार से जल्द मांगों पर गौर करने की मांग की है


