बनभूलपुरा रेलवे की करीब 29 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को हटाया जाए
उत्तराखण्ड
24 फरवरी 2026
बनभूलपुरा रेलवे की करीब 29 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को हटाया जाए
हल्द्वानी । उत्तराखंड के हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे जमीन अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण को लेकर फैसला देते हुए कहा है कि रेलवे की करीब 29 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को हटाया जाए. इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि 19 मार्च के बाद सर्वे शुरू किया जाए, जिसमें देखा जाए कि करीब 4500 से ज्यादा घरों में से किसके पास पीएम आवास योजना के तहत घर पाने की एलिजिबिलिटी है या नहीं. 55 मिनट तक चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए हर पहलू पर गौर किया. इंदिरा नगर, बनभूलपुरा, छोटी लाइन, गफूर बस्ती और लाइन नंबर इलाके में अतिक्रमण का यह मुद्दा लंबे समय से विवाद में रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम आदेश कहा कि ये जमीन राज्य की है और उसे अधिकार है कि वो अपनी जमीन का यूज कैसे करे. साथ ही परिवारों की पहचान की जाए जो इससे प्रभावित होंगे. बलभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाए जाएंगे. गरीब, अल्प आय वर्ग वाले लोगों की सर्वे के तहत पहचान की जाए कि उन्हें पुनर्वास के तहत रहने के लिए घर दिए जा सकते हैं या नहीं. साथ ही प्रभावित लोगों को अगले 6 महीने तक दो-दो हजार रुपये दिए जाएंगे.
CJI सूर्यकांत क्या बोले?
वहीं, CJI सूर्यकांत ने कहा कि ‘उनसे वहीं रहने के लिए क्यों कहा जाए, जबकि बेहतर सुविधाओं वाली कोई दूसरी जगह हो सकती है. किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए दोनों तरफ खाली जगह की ज़रूरत होती है. वहां रहने वाले लोग यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को लाइन वगैरह कहां बिछानी चाहिए
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने क्या कहा?
सुनवाई करते हुए जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि ‘इसमें कोई शक नहीं है कि यह राज्य की ज़मीन है और ज़मीन का इस्तेमाल कैसे करना है, यह तय करना राज्य का अधिकार है. बस एक बात है कि मिस्टर भूषण के क्लाइंट वहां रह रहे हैं और अब मुद्दा यह है कि जब उन्हें जाने के लिए कहा जाएगा.. तो उनका पुनर्वास कैसे किया जाएगा ताकि उन्हें कुछ सहारा मिल सके. हमारी पहली नज़र में यह मदद ज़्यादा है और अधिकार कम.’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से माना और कहा कि ये सरकारी की जमीन है और कब्जा हटना ही चाहिए. अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह जमीन रेलवे की है और उन्हें इस पर कई योजनाओं की शुरुआत करनी है और उनका विस्तारीकरण भी करना है.


