उत्तराखंड

नगर में जगह-जगह सज संवरकर होली तैयार

नीरज ठाकुर

उत्तराखण्ड
2 फरवरी 2026
नगर में जगह-जगह सज संवरकर होली तैयार
काशीपुर। देवभूमि उत्तराखंड के कोने-कोने में आज होली की धूम मची है. ज्यादातर महिलाएं सज संवरकर बच्चों के साथ होलिका पूजन कर रही हैं. पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार पूजन के बाद होलिका दहन किया जाता है. मान्यता है कि होली से पहले होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. होलिका दहन के दौरान भक्त प्रह्लाद की जय, होलिका माता की जय और नरसिंह भगवान की जय के उद्घोष कर लोग एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं.

नगर की सिंघान होली का सालों से होली पूजन का विशेष प्रबंध किया जाता रहा है साथ ही मुंशी राम चौराहा, लाहोरियान बम बम होली, रहमखानी होली, किला होली, घास मण्डी होली, आवास विकास, रतन सिनेमा होली नाग नाथ होली सज संवरकर तैयार है।

होलिका पूजन का विशेष महत्व है. होलिका पूजन के अंतर्गत समाजिक संगठन लकड़ी इकट्ठी करके मोहल्लों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाते हैं. यहां सभी महिलाएं विधि-विधान से होलिका पूजन करती हैं. होली पूजन के बाद निर्धारित समय पर होलिका दहन किया जाता है.

शास्त्रों के अनुसार, मान्यता है कि पुत्र प्रह्लाद की भक्ति से परेशान होकर पिता हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रह्लाद को मारने के लिए कहा था. कहा जाता है कि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसको आग जला नहीं सकती. इसी वरदान के कारण होलिका भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर लकड़ियों के ढेर पर बैठ गईं. लेकिन भक्त प्रह्लाद का श्रीहरि में अटूट विश्वास था. इसलिए प्रह्लाद को आंच तक नहीं आई और होलिका जलकर राख हो गईं. इसी होलिका की राख से प्रह्लाद ने पहली होली खेली थी.

वहीं, होलिका पूजन करने आई महिलाओं ने कहा कि, होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है. इसीलिए सभी महिलाएं होली पूजन करती हैं. अपने परिवार में अपने बच्चों की दीर्घायु के लिए होलिका मैया से प्रार्थना करती हैं. होली का पर्व एक-दूसरे की गलतियों को भुलाकर आपसी भाईचारे और प्रेम सौहार्द का पर्व है.

वहीं इस बार होली का शुभ मुहूर्त आज 2 मार्च को है. 2 मार्च को होली पूजन होगा.

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